Loo (wind) in Hindi | लू क्या है एवं इससे बचने के उपाय ?

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Loo (wind) in Hindi

Loo (लू) एक मजबूत, धूल भरी, भीषण, गर्म और शुष्क गर्मी की हवा है जो उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों और पाकिस्तान में चलती है।

यह मई और जून के महीनों में विशेष रूप से चलती है।

इसका तापमान (45°C – 50°C या 115°F – 120°F) बहुत उच्च होता है।

इसके संपर्क में आने से अक्सर घातक heatstroke हो जाता है।

यह बेहद कम आर्द्रता और उच्च तापमान का कारण बनता है।

लू के कारण मई और जून के महीनों में इसके प्रभावित क्षेत्रों में पेड़-पौधों एवं जीवों पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।

Loo की उत्पत्ति

लू मुख्यतः उत्तर-पश्चिमी भारतीय उपमहाद्वीप के बड़े रेगिस्तानी क्षेत्रों में उत्पन्न होती है: Great Indian Desert, चोलिस्तान रेगिस्तान और दक्षिणी बलूचिस्तान के रेगिस्तानी इलाके।

भारतीय मानसून के आगमन के साथ, लू गर्मियों के अंत में समाप्त होती है।

उत्तर भारत और पाकिस्तान के कुछ क्षेत्रों में, मानसून से पहले काली आँधी के रूप में जानी जाने वाली संक्षिप्त, लेकिन हिंसक, धूल भरी आँधियाँ चलती हैं।

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पारिस्थितिक प्रभाव

कई पक्षी और जानवर गर्मियों के महीनों में लू का शिकार हो जाते हैं।

विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहाँ पर लू बिना किसी अवरोध के चलती है और जहाँ पशु-पक्षियों को शरण नहीं मिल पाती है।

“लू” लगना गर्मी के मौसम की एक आम बीमारी है।

“लू” लगने का प्रमुख कारण शरीर में electrolytes और पानी की कमी होना है।

गर्मियों में पसीने के कारण नमक और पानी का बड़ा हिस्सा शरीर से निकल जाता है।

यह खून की गर्मी को बढ़ा देता है।

कुछ भारीपन-सा एहसास होने लगता है सिर में,नाड़ी की गति बढ़ने लगती है ।

शरीर के अंदर खून भी तेज़ी से बहने लगता है।

साँस लेने की गति भी ठीक नहीं रहती तथा शरीर में ऐंठन-सी लगती है।

कभी-कभी बुखार काफी बढ़ जाता है।

हाथ और पैरों के तलुओं में जलन-सी होती है। आँखें भी जलने लगती हैं।

इस कारण अचानक बेहोशी व सही उपचार न होने पर रोगी की मौत भी हो सकती है।

इसे कभी-कभी लोकप्रिय भारत-पाकिस्तानी संस्कृति में एक दुष्ट हवा के रूप में जाना जाता है।

बच्चों और बुजुर्गों को खासकर लू से बचने की सलाह दी जाती है।

ज्यादातर लोग लू से प्रभावित महीनों में दोपहर के समय घर के अंदर रहने का प्रयास करते हैं।

Heatstroke को आमतौर पर लू लगना कहा जाता है।

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Popular Drinks

कुछ शर्बतों का लू के मौसम में व्यापक रूप से सेवन किया जाता है।

इनके बारे में माना जाता है कि ये शरीर पर शीतलन प्रभाव डालते हैं और लू के कारण heatstroke से सुरक्षा प्रदान करते हैं।

इनमें गुलाब, खस, शहतूत, बेल और फालसा के शर्बत शामिल हैं।

रूह अफज़ा नामक एक विशिष्ट यूनानी नुस्खा इन लोकप्रिय शीतलन पदार्थों को मिलाकर बनाया जाता है और एक सिरप के रूप में बेचा जाता है।

इस सिरप का इस्तेमाल शर्बत, cold milk drink, ices और cold desserts जैसे फलूदा के स्वाद के लिए किया जाता है।

लस्सी उत्तर भारत और पाकिस्तान में दही से बनाया जाने वाला पेय है जो बेहद लोकप्रिय है।

माना जाता है कि लस्सी लू के खिलाफ कुछ सुरक्षा प्रदान करता है।

इसके अतिरिक्त राजस्थान के रेगिस्तानी राज्य में कैरी का पन्ना (कच्चे/अधपके आम का पना), लू से बचने के लिए एक बहुत लोकप्रिय पेय है।

हालाँकि यह अब भारत के अन्य हिस्सों में भी लोकप्रिय है।

Loo से बचने के उपाय

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1. दोपहर के समय बाहर नहीं निकलना चाहिए। बाहर जाना ही पड़े तो सिर व गर्दन और दोनों कानों को तौलिए या किसी कपड़े से ढँक लेना चाहिए।

2. गर्मी के दिनों में हल्का व जल्द पचने वाला भोजन करना चाहिए। खाली पेट कभी बाहर नहीं जाना चाहिए।

3. गर्मी के दिनों में भरपूर पानी पीते रहना चाहिए जिससे शरीर में पानी की कमी नहीं होने पाए। पानी में नींबू व नमक मिलाकर दिन में पीते रहने से लू नहीं लगती है।

4. गर्मी के दौरान नरम, मुलायम, सूती कपड़े पहनना चाहिए जिससे हवा और कपड़े शरीर के पसीने को सोखते रहें।

5. गर्मी में ठंडाई का सेवन नियमित करना चाहिए।

6. मौसमी फल जैसे, खरबूजा, तरबूज, अंगूर इत्यादि का सेवन करना चाहिए।

7. गर्मी के दिनों में प्याज का सेवन भी अधिक करना चाहिए।

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Loo लगने पर

लू लगने पर तुरंत ही किसी डॉक्टर को दिखाएं।

लू से प्रभावित इंसान को किसी ठंडी खुली जगह पर ले जाना चाहिए और सुराही के पानी का सेवन करवाना चाहिए।

बर्फ के पानी का सेवन नहीं करवाना चाहिए। कच्चे आम के पन्ने का सेवन करवाना चाहिए।



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