Struggles of Life- A Story in Hindi | जीवन के संघर्ष पर कहानी

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Struggles of Life

दोस्तों, हमारे जीवन में कई बार हमें struggles या संघर्षों का सामना करना पड़ता है। कई बार ऐसे situations आते हैं जिनका हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

पेश है जीवन के संघर्ष/struggles पर ऐसी ही एक कहानी-

एक समय की बात है किसी शहर में बिंदु नाम की लड़की अपने पिता के साथ रहा करती थी।

उसे छोटी-छोटी बातों की शिकायत करने की आदत थी। उसे लगता था कि उसकी ज़िन्दगी सबसे बुरी है।

उसे पता नहीं था कि वो अपनी ज़िन्दगी में कैसे आगे बढ़ पायेगी।

बिंदु अपने जीवन के संघर्षों से तंग आ चुकी थी।

जैसे ही उसे ये लगने लगता कि समस्या का समाधान हो चूका है, ठीक दूसरी परेशानी सामने आ जाती।

आख़िरकार उसने अपने पिता को ये बात बताने की ठानी और फिर एक दिन अपने पिता को सारी बात बताई।

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पिता की सलाह

उसके पिता पेशे से एक chef यानी रसोइया थे।

उन्होंने अपना ज्यादातर वक़्त रसोई में ही बिताया था ।

इसलिए उन्होंने रसोई में से ही कुछ उदाहरण देकर बिंदु को सलाह देने की ठानी।

एक दिन वे अपने साथ बिंदु को रसोई में ले गए और उसे बैठने को कहा।

उन्होंने तीन बर्तन लिए और तीनों में पानी डालकर उनको चूल्हे पर ऊँची आंच पर रख दिया।

जैसे ही पानी हल्का गर्म होने लगा तो पहले बर्तन में उन्होंने कुछ आलू रखे, दूसरे में कुछ अंडे और तीसरे में कुछ पीसे हुए कॉफी बीन्स।

और फिर बिंदु से बिना कुछ कहे सामने जाकर बैठ गए और देखने लगे।

बिंदु को ये सब समझ नहीं आ रहा था।

वो बस अपने पिता को ये सब करते हुए देख रही थी।

बीस मिनट के बाद उसके पिता ने तीनों बर्तनों को चूल्हे में से उतारकर अलग रख दिया।

उन्होंने पहले बर्तन में से आलू निकालकर एक कटोरी में रखा, दूसरे बर्तन में से अण्डों को निकालकर दूसरे कटोरे में रखा और फिर तीसरे बर्तन से कॉफी निकालकर एक कप में रख दिया।

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जीवन की सीख

अब उन्होंने बिंदु को ये सब दिखते हुए पूछा, “बिंदु, बताओ अब तुम्हें क्या दिख रहा है ?

“आलू, अंडे और कॉफी”, बिंदु ने झट से जवाब दिया।

“अच्छे से देखो”, उन्होंने कहा, “और उनको छूकर देखो”

बिंदु ने ठीक वैसा ही किया। बिंदु ने देखा कि आलू नरम हो चुके थे।

उसके पिता ने फिर अण्डों को छिलने को कहा।

बिंदु ने अण्डों के छिलके को हटाया तो पाया कि अंडे सख्त हो चुके थे।

और आखिर में उन्होंने उसे कॉफी पीने को कहा।

बिंदु ने कॉफी को पिया और उसके चेहरे कॉफी की सुगंध से खिल गए।

“पापा, इसका क्या मतलब हुआ ?”, बिंदु ने अपने पापा से पूछा।

फिर उन्होंने समझाया कि आलू, अंडे और कॉफी बीन्स में से प्रत्येक को एक ही समान उबलते पानी का सामना करना पड़ा था।

हालाँकि, हर एक ने अलग तरह से प्रतिक्रिया दी।

आलू मजबूत, कठोर और अविश्वसनीय था, लेकिन उबलते पानी में, यह नरम और कमजोर हो गया।

ठीक इसी प्रकार से अंडा पहले नाजुक था।

उसके बाहर का हिस्सा उसके अंदर के हिस्से को बचा रहा था।

लेकिन उबलते पानी में आने से अंडे के अंदर का हिस्सा सख्त हो गया।

हालांकि, पीसे हुए कॉफी बीन्स यूनिक यानी अद्वितीय थे।

उबलते पानी के संपर्क में आने के बाद, उन्होंने पानी को बदल दिया और कुछ नया बना।

“इनमें से तुम क्या हो ?”, बिंदु के पिता ने उससे पूछा।

बिंदु कुछ नहीं बोल पायी और बस मुस्कुरा दी। उसे समझ आ गया था।

उसके पिता ने उसे समझाते हुए कहा, “सवाल ये उठता है कि जब कोई समस्या या प्रतिकूलता दरवाजे पर दस्तक देती है, तो तुम कैसे प्रतिक्रिया देती हो ? क्या तुम एक आलू, एक अंडा, या एक कॉफी बीन हो ?”

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जीवन के संघर्ष

दोस्तों, हमारे जीवन में, कई ऐसे situations, ऐसी परिस्थितियाँ आती हैं जब हम उनसे हार मानने लगते हैं और निराश हो जाते हैं। हमें struggles का सामना करना पड़ता है।

हमारे आसपास कई तरह की घटनाएँ होती हैं, कभी हमारे साथ होती हैं और कभी किसी और के साथ, लेकिन केवल एक चीज जो वास्तव में मायने रखती है वह यह है कि हम इन situations पर कैसे react करते हैं या प्रतिक्रिया कैसे करते हैं।

और इनसे क्या सीख लेते हैं। कई बार जब परिस्थिति हमारे अनुकूल होती है तो हमें अच्छा लगने लगता है और जब हमारे विपरीत तो हम निराश हो उठते हैं।

दोस्तों, जीवन इसी का नाम है। हर बार हमारे हिसाब से चीज़ें नहीं होने वाली।

जीवन सभी झुकावों, असफलताओं को अपनाने और उनसे सीखने, और उन सभी struggles/संघर्षों को परिवर्तित करने के बारे में है जिससे हम कुछ सकारात्मक अनुभव कर सकें। 

अंग्रेजी में एक कहावत है, “The same boiling water that softens the potato hardens the egg. It’s about what you’re made of, not the circumstances.”

यानी “वही उबलता पानी जो आलू को नरम करता है, अंडे को सख्त कर देता है। यह इस बारे में है कि आप किन चीजों से बने हैं, यह परिस्थितियों के बारे में नहीं है।”

In simple sentences, हमें परिस्थितियों पर सब कुछ दोष नहीं देना चाहिए। हमें इन परिस्थितियों का सामना मजबूती से करना चाहिए।

 

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